
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) परिसर में किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, जुलूस और प्रदर्शन पर एक महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ को सूचित किया है। आदेश मंगलवार से प्रभावी हो गया है।

प्रो. मनोज कुमार के अनुसार, यह निर्णय इस आशंका के आधार पर लिया गया है कि बिना अनुमति आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों, जुलूसों या प्रदर्शनों से यातायात बाधित हो सकता है, जनशांति भंग हो सकती है और लोगों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है। आदेश में कहा गया है कि पूर्व में आयोजक कई बार छात्र प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में असफल रहे, जिससे परिसर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी।
पुलिस आदेश का हवाला
प्रॉक्टर कार्यालय ने सब-डिविजन सिविल लाइंस के एसीपी द्वारा 26 दिसंबर 2025 को जारी आदेश का हवाला दिया है, जिसमें गृह मंत्रालय की अधिसूचना के तहत विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, रैली, धरना, प्रदर्शन या ऐसी गतिविधि पर रोक लगाने की बात कही गई है, जिससे आम लोगों की शांति और यातायात प्रभावित हो।
आदेश के खिलाफ विरोध
प्रतिबंध के खिलाफ शिक्षकों और छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई है। डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य मिथुराज धुसिया ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का दायित्व है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण हों, लेकिन यातायात अवरोध जैसे कारणों का हवाला देकर आंदोलनों पर पूर्ण रोक लगाना स्वीकार्य नहीं है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) दिल्ली राज्य के सचिव अभिज्ञान ने कहा कि यह आदेश छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास है। उनका आरोप है कि हिंसा करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रदर्शन और जुलूस पर रोक लगाई जा रही है।
वहीं नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने भी आदेश की कड़ी निंदा की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने इसे तानाशाही और छात्र-विरोधी कदम बताया। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है और किसी मनमाने प्रशासनिक आदेश से इसे समाप्त नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने भी आदेश की भर्त्सना करते हुए कहा कि प्रशासन अस्पष्ट कारणों का हवाला देकर असहमति के मौलिक अधिकार को दबाने का प्रयास कर रहा है।
हालिया घटनाओं की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 12 फरवरी को नॉर्थ कैंपस स्थित आर्ट फैकल्टी के बाहर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक प्रोफेसर पर पानी और डस्टबिन फेंके जाने की घटना सामने आई थी। इसके अगले दिन यूजीसी इक्विटी से जुड़े मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और हंगामा हुआ, जो मारपीट तक पहुंच गया। बाद में छात्रों ने मौरिस नगर थाने के बाहर भी विरोध दर्ज कराया था। पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज की थी।
इन घटनाओं पर डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने चिंता व्यक्त करते हुए निंदा की थी।
फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन अपने निर्णय को सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर जरूरी बता रहा है, जबकि छात्र संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश करार दे रहे हैं।

