भारतीय विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा क़रीब 10 साल बाद हो रहा है क्या कह रहे हैं वहाँ के एक्सपर्ट..

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को पाकिस्तान पहुँच रहे हैं. किसी भी भारतीय विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा क़रीब 10 साल बाद हो रहा है.

हालाँकि जयशंकर का यह दौरा शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन (एससीओ) की बैठक में शामिल होने के लिए है न कि द्विपक्षीय दौरा.

इस बार एससीओ की सालाना समिट पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 15 और 16 अक्तूबर को होने जा रही है. भारत भी एससीओ का सदस्य है और भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुआई विदेश मंत्री एस जयशंकर कर रहे हैं.

जयशंकर के पाकिस्तान दौरे से दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सुधरने की बहुत उम्मीद तो नहीं की जा रही है, लेकिन पाकिस्तान में इसे लेकर काफ़ी चर्चा है.

जयशंकर ने अपने पाकिस्तान दौरे को लेकर पिछले हफ़्ते कहा था, ”यह दौरा एक क्षेत्रीय समिट के लिए है. मैं पाकिस्तान और भारत के संबंधों पर चर्चा करने नहीं जा रहा हूँ. मैं एससीओ के एक अच्छे सदस्य के तौर पर जा रहा हूँ.”

एससीओ का गठन 2001 में हुआ था. इस गुट में चीन, रूस, ईरान, भारत, कज़ाख़स्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं.

पाकिस्तान में होने वाले इस समिट में भारत के शामिल होने को लेकर आशंका थी. हालांकि पाकिस्तान ने इस समिट में शामिल होने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया था.

पहले उम्मीद की जा रही थी कि भारत इस समिट में किसी जूनियर मंत्री या ब्यूरोक्रेट को भेज सकता है लेकिन जयशंकर के जाने की घोषणा पाकिस्तान के लिए भी हैरान करने वाली थी. हालांकि दोनों देशों के संबंधों में पिछले कई सालों से स्थिरता है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा?

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने एस जयंशकर के दौरे को लेकर सोमवार को कहा कि अभी भारत से द्विपक्षीय बातचीत को लेकर कोई योजना नहीं है.

डार ने कहा कि मेज़बान देश द्विपक्षीय बातचीत के लिए पेशकश नहीं करता है. उन्होंने कहा कि अगर भारत अनुरोध करेगा तो विचार किया जाएगा. डार ने कहा कि द्विपक्षीय बातचीत के लिए न तो भारत ने अनुरोध किया है और न ही पाकिस्तान ने.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि जयशंकर के साथ भारत के एक दर्जन पत्रकारों को आने के लिए वीज़ा दिया गया है. भारत के पत्रकार आज ही रवाना हो गए हैं जबकि जयशंकर मंगलवार को रवाना होंगे. जयशंकर से सोमवार दोपहर बाद दिल्ली में पत्रकारों ने पूछा कि वो पाकिस्तान कब रवाना हो रहे हैं तो उन्होंने कहा कि अब भी 24 घंटे हैं.

पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल ’24 न्यूज़’ से पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने जयशंकर के पाकिस्तान दौरे को भारत का स्मार्ट मूव बताया है.

हिना रब्बानी खर ने कहा, ”भारत ने किसी ब्यूरोक्रेट को ना भेज एस जयशंकर को भेजने का फ़ैसला किया और मेरा मानना है कि यह उनका स्मार्ट मूव है.

भारत के साथ हमारा द्विपक्षीय संबंध सामान्य सतह पर नहीं है.

यहाँ तक कि दोनों देशों में एक दूसरे के यहाँ उच्चायुक्त भी नहीं हैं. ये बहुत अजीब स्थिति है.

जब आप किसी देश के राजदूत को निकालते हैं तो आप बहुत ही वज़नदार पैग़ाम देते हैं. भले एस जयशंकर आ रहे हैं लेकिन भारत के साथ हमारे ताल्लुकात नॉर्मल नहीं हैं.”

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित को भी जयशंकर के पाकिस्तान दौरे से बहुत उम्मीद नहीं है.

पाकिस्तान में लोग जयशंकर के दौरे को भारत का यूटर्न बता रहे हैं

उन्होंने पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल एबीएन से बात करते हुए कहा, ”पाकिस्तान में लोग जयशंकर के दौरे को भारत का यूटर्न बता रहे हैं. लोग कह रहे हैं कि पहले नहीं आना था और अब आ रहे हैं. मेरा मानना है कि भारत ने कोई भी यूटर्न नहीं लिया है.”

”इससे पहले भी भारत के विदेश मंत्री एससीओ की बैठक में किर्गिस्तान गए थे. जयशंकर ने बहुत वाजिब बात कही है कि वह बहुपक्षीय बैठक में शामिल होने जा रहे हैं न कि द्विपक्षीय बैठक में.”

अब्दुल बासित ने कहा, ”जयशंकर ने ये भी कहा था कि वह बहुत ही सभ्य व्यक्ति हैं और पाकिस्तान उसी सभ्यता के साथ जा रहे हैं. मुझे लग रहा है कि जयशंकर की यह टिप्पणी पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो पर तंज़ की तरह थी. बिलावल साहब जब विदेश मंत्री के तौर पर गोवा गए थे तो उन्होंने द्विपक्षीय मुद्दा उठा दिया था जबकि वह भी एससीओ की बैठक में ही शामिल होने आए थे.”

”उन्होंने कश्मीर का मुद्दा भी उठा दिया था. भारत को यह पसंद नहीं आया था. मेरी भी यही ख़्वाहिश है कि कोई औपचारिक द्विपक्षीय बात ना हो. मुझे नहीं लगता है कि भारत ने पाकिस्तान से बातचीत करने का कोई फ़ैसला अभी किया है.”

पाकिस्तान के जाने-माने राजनीतिक टिप्पणीकार नजम सेठी ने जयशंकर के पाकिस्तान दौरे को लेकर कहा कि भारतीय विदेश मंत्री के आने को लेकर पाकिस्तान में हलचल है.

नजम सेठी ने पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल समा टीवी से कहा, ”जयशंकर हार्डलाइनर हैं. भारत में जो चार-पाँच हार्डलाइनर हैं, उनमें से एक जयशंकर भी हैं. वह नरेंद्र मोदी के बहुत क़रीबी हैं. जयशंकर स्पष्ट कह रहे हैं कि कश्मीर पर कोई बातचीत नहीं होगी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान का जैसा रवैया होगा, उसी हिसाब से भारत प्रतिक्रिया देगा.”

सेठी ने कहा, ”पाकिस्तान में अभी अस्थिरता का दौर है, ऐसे में मुझे नहीं लगता है कि शहबाज़ शरीफ़ भारत के साथ कोई ठोस बातचीत शुरू करेंगे. पर्दे के पीछे भले कुछ और हो. मैं नहीं मानता कि एस जयशंकर का आना कोई पॉलिसी शिफ़्ट है. जयशंकर पाकिस्तान में कोई नरमी नहीं दिखाएंगे और इसीलिए वो आ भी रहे हैं.”

भारत पाकिस्तान देशों के लिए मौक़ा

नजम सेठी ने कहा, ”जैसे ही कश्मीर की बात करेंगे, भारत बात नहीं करेगा. जयशंकर इसलिए आ रहे हैं ताकि ये संदेश ना जाए कि भारत ब्रेकर की भूमिका में है. पाकिस्तान न केवल आर्थिक संकट में है बल्कि राजनीतिक अस्थिरता के दौर से भी गुज़र रहा है, ऐसे में भारत कोई नरमी नहीं दिखाएगा.”

पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे अजय बिसारिया ने हॉन्ग कॉन्ग के अख़बार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा है कि जयशंकर का पाकिस्तान जाना दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने का अहम मौक़ा है.

बिसारिया ने कहा, ”भारत ने एक मंत्री को भेजने का फ़ैसला कर संदेश दिया है कि वह अपने पड़ोसी से संबंधों में स्थिरता चाहता है. दोनों देश संबंधों की शुरुआत अपने-अपने उच्चायुक्त भेजकर कर सकते हैं. इसके अलावा ट्रेड भी शुरू हो सकता है.”

अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लिखने वाले पाकिस्तान के टिप्पणीकार क़मर चीमा ने जयशंकर के पाकिस्तान आने पर कहा कि उन्हें द्विपक्षीय वार्ता करनी चाहिए.

क़मर चीमा कहते हैं, ”जयशंकर मानते हैं कि बिना ट्रेड के कोई संबंध नहीं चल सकता है और भारत-पाकिस्तान के बीच कोई कारोबारी संबंध नहीं है. भारत और चीन के बीच सवा सौ अरब डॉलर का कारोबार हो सकता है तो भारत और पाकिस्तान के बीच क्यों नहीं हो सकता है? पाकिस्तान वॉर और टेरर में फँसा हुआ है. भारत ने तो बहुत अक्लमंदी दिखाई और गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई. भारत पहले कहता था कि हमें गुटनिरपेक्ष रहना है और अब कह रहा है कि हमें किसी एक साथ नहीं बल्कि सब के साथ रहना है.”

पाकिस्तान के आम लोग भी वहाँ के मीडिया से बातचीत में जयशंकर के पाकिस्तान आने से उत्साहित दिख रहे हैं और कह रहे हैं कि दोनों मुल्कों के बीच संबंध अच्छे होने चाहिए.