लक्सर और खानपुर दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की चैंपियन की तैयारी, भाजपा में बढ़ी हलचल
रुड़की। खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने लक्सर और खानपुर विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश कर राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं। उनके इस ऐलान के बाद भाजपा के भीतर संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब सवाल यह है कि पार्टी उनकी दोनों सीटों पर दावेदारी को किस तरह लेती है और मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में चैंपियन क्या रुख अपनाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके अगले कदम का असर दोनों विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
दरअसल, बीते रविवार को कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने अपने आवास पर समर्थकों की बैठक बुलाई थी। बैठक का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समर्थकों से रायशुमारी करना बताया गया। चर्चा है कि बैठक के लिए करीब सौ कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन समर्थकों की संख्या इससे अधिक पहुंच गई। इस दौरान चैंपियन ने अपने संबोधन में क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का जिक्र किया और खानपुर तथा लक्सर के विकास के लिए अपनी दावेदारी को मजबूत बताया।
बैठक के दौरान उन्होंने लक्सर और खानपुर, दोनों विधानसभा सीटों से भाजपा के सामने अपनी दावेदारी रखने की बात कहकर राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया। उनके इस बयान को आगामी चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, चैंपियन ने अभी तक टिकट को लेकर अपनी आगे की रणनीति स्पष्ट नहीं की है।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि यदि भाजपा उन्हें दोनों सीटों से चुनाव लड़ने का अवसर नहीं देती, तो वह कोई दूसरा रास्ता अपना सकते हैं। इनमें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने की संभावना भी शामिल है। वहीं, यदि पार्टी उन्हें किसी एक सीट से टिकट देती है, तो उनकी रणनीति क्या होगी, यह भी आने वाले समय में स्पष्ट हो सकेगा।
यदि चैंपियन निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो खानपुर और लक्सर में मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। उनके चुनाव मैदान में उतरने से विभिन्न राजनीतिक दलों के वोट बैंक पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में किसी दल को फायदा मिल सकता है, तो किसी के लिए चुनावी चुनौती बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बजाय उनकी पत्नी को टिकट दिया था, लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हो सकी थी। अब चैंपियन एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और क्षेत्र में खोया जनाधार वापस पाने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में दोनों सीटों पर दावेदारी के उनके ऐलान को आगामी चुनाव से पहले एक अहम राजनीतिक कदम माना जा रहा है। फिलहाल सभी की निगाहें भाजपा के रुख और चैंपियन के अगले फैसले पर टिकी हैं।
