
देहरादून।
उत्तराखंड में निवास कर रहे नेपाल मूल के लोगों को चुनाव आयोग की विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में शामिल होने के लिए भारतीय नागरिकता होना अनिवार्य होगा। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को चुनाव आयोग के समक्ष नागरिकता प्रमाण और जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

उत्तराखंड के चंपावत, पिथौरागढ़ से लेकर देहरादून तक नेपाल और उत्तराखंड के बीच रोटी-बेटी का पुराना संबंध रहा है। कई नेपाली बेटियां विवाह के बाद उत्तराखंड में रह रही हैं, वहीं अनेक परिवार वर्षों से यहां बसे हैं और उनके बच्चों का जन्म भी यहीं हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा था कि एसआईआर प्रक्रिया में इनके लिए क्या प्रावधान होंगे।
इस संबंध में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने स्पष्ट किया कि भारत में किसी भी बाहरी देश से आए व्यक्ति को मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिकता होना जरूरी है। जो लोग वर्तमान मतदाता सूची में शामिल हैं, उनका नाम भी नागरिकता के आधार पर ही दर्ज है।
उन्होंने बताया कि जिन नेपाली मूल के लोगों ने भारतीय नागरिकता प्राप्त कर ली है और जो वर्ष 2003 में मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उन्हें एसआईआर के दौरान नागरिकता और जन्मतिथि का प्रमाण देना होगा। बीएलओ मैपिंग संभव न होने की स्थिति में एसआईआर के इन्म्यूरकेशन फॉर्म के साथ ये दस्तावेज जमा करने होंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर निर्णय लिया जाएगा।
साथ ही, यदि किसी नेपाली मूल के मतदाता को ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद नोटिस जारी होता है, तो उन्हें भी नागरिकता से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

