ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना बनेगी पर्वतीय रेलवे की मिसाल: सलीम अहमद…

ऋषिकेश/कर्णप्रयाग।
रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन मंगलवार को ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अंतर्गत निर्मित सुरंगों और प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी मात्र ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। यह परियोजना भविष्य की पर्वतीय रेलवे परियोजनाओं के लिए एक मानक स्थापित करेगी।

निरीक्षण के दौरान सलीम अहमद ने कहा कि सुरंगों पर आधारित यह रेल परियोजना न केवल देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि हिमालयी क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी जीवनरेखा भी सिद्ध होगी। यह परियोजना गढ़वाल हिमालय क्षेत्र को सुरक्षित, विश्वसनीय और हर मौसम में रेल संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है, जिससे बार-बार भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कमजोर सड़क नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी।

उन्होंने बताया कि शिवपुरी और ब्यासी रेलवे स्टेशनों का निर्माण कार्य बीते वर्ष दिसंबर माह से शुरू हो चुका है। वहीं देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धार देवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग स्टेशनों का निर्माण कार्य आगामी मई माह से प्रारंभ किया जाएगा।

अक्तूबर से शुरू होगा विद्युत व सिग्नलिंग कार्य
परियोजना में सुरंगों की खुदाई का कार्य लगभग 98 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। कुल 19 पुलों में से 8 पुलों का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया गया है। ट्रैक बिछाने के लिए निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सर्वे कार्य चल रहा है और शीघ्र ही ट्रैक बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही अक्तूबर माह से रेलवे ट्रैक पर विद्युत और सिग्नलिंग का कार्य भी प्रारंभ कर दिया जाएगा।

आरवीएनएल के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन विकास को भी नई गति देगी।