
UP: गोरखपुर के सिंघड़िया इलाके में अस्पताल मैनेजर पर गोली चलाने की घटना के बाद आरोपी अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा का नाम सामने आते ही पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि अंशिका बीते कई वर्षों से एक सुनियोजित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क चला रही थी, जिसमें बड़े अधिकारी, पुलिसकर्मी और राजनीतिक रसूख वाले लोग भी फंस चुके थे।

पुलिस को वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल चैट के आधार पर जानकारी मिली है कि अंशिका फर्जी दुष्कर्म केस में फंसाने की धमकी देकर करीब डेढ़ सौ लोगों से करोड़ों रुपये की उगाही कर चुकी है। पीड़ितों में सामान्य नागरिकों के साथ-साथ अयोध्या में तैनात एक क्षेत्राधिकारी (सीओ) और गोरखपुर शहर के करीब 15 पुलिसकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। बदनामी और डर के कारण कई लोग उसके जाल से बाहर नहीं निकल सके।
जांच में सामने आया है कि अंशिका सोशल मीडिया मैसेंजर के जरिए पहले लोगों से संपर्क करती थी, फिर वीडियो कॉल पर निजी बातचीत के दौरान उनकी रिकॉर्डिंग कर लेती थी। बाद में इन्हीं वीडियो क्लिप्स को ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
ग्रामीणों के अनुसार कोरोना काल में पिता की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था। इसके बाद अंशिका और उसके परिवार की गतिविधियों को लेकर गांव में चर्चाएं बढ़ने लगीं और सामाजिक दूरी भी बढ़ती चली गई। लोग उनसे बातचीत तक से बचने लगे थे।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक अंशिका की लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगे शौक उसकी गिरफ्तारी तक पहुंचने में अहम सुराग बने। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद वह अंडरग्राउंड हो गई थी, लेकिन अब पुलिस जांच में उसके पूरे नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं।

