आईआईटी रुड़की ने कमांड एरिया डेवलपमेंट (एम-सीएडी) के आधुनिकीकरण के लिए जल शक्ति मंत्रालय के साथ हाथ मिलाया

  • साझेदारी का उद्देश्य कृषि समुदायों को सशक्त बनाने एंव महिलाओं की भागीदारी के माध्यम से सिंचाई दक्षता में सुधार हेतु कमांड एरिया डेवलपमेंट (एम-सीएडी) का आधुनिकीकरण करना है।
  • ग्रामीण भारत के लिए स्मार्ट जल प्रबंधन एंव ग्रामीण प्रगति के लिए नीतिगत समर्थन की पहल।

आईआईटी रुड़की में विकसित अत्याधुनिक सिंचाई जल प्रबंधन समाधानों से उत्तराखंड को लाभ होगा।

आईआईटी रुड़की, उत्तराखंड, भारत – 13 अगस्त 2025: सिंचाई प्रथाओं को बदलने व ग्रामीण स्थिरता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम में, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (सीएडीडब्ल्यूएम) विंग ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

इस साझेदारी का उद्देश्य केंद्रित अनुसंधान, क्षमता निर्माण एंव नीतिगत नवाचार के माध्यम से कमांड क्षेत्र विकास (एम-सीएडी) आधुनिकीकरण कार्यक्रम को मज़बूत करना है। इसका उद्देश्य भारत भर में कृषि भूमि तक जल पहुँचाने के तरीके में सुधार लाना है। अनुसंधान, प्रशिक्षण एंव नीतिगत सुझावों के माध्यम से, यह सहयोग किसानों को अधिक कुशल, टिकाऊ और विश्वसनीय सिंचाई पद्धतियों तक पहुँचने में मदद करेगा।

यह सहयोग उत्तराखंड के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ पहाड़ी भूभाग, खंडित भूमि जोत एंव बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण कुशल जल प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस साझेदारी से ऐसे नवीन सिंचाई मॉडलों का परीक्षण और विस्तार किए जाने की उम्मीद है जो देश के हिमालयी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के लिए आदर्श बन सकें।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में जल शक्ति मंत्रालय की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने भी भाग लिया एंव सिंचाई आधुनिकीकरण के लिए एक सुदृढ़ व प्रासंगिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “भारत भर में सिंचाई जल आधुनिकीकरण प्रयासों के दस्तावेजीकरण, भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप सिंचाई प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण और जल उपयोगकर्ता संघों तथा निर्णय लेने में महिलाओं को शामिल करने की अत्यंत आवश्यकता है।”

आईआईटी रुड़की में 2024 में स्थापित सतत ग्रामीण विकास केंद्र (सीएसआरडी), एम-सीएडी पहलों को समर्थन देने के लिए अनुसंधान, नवाचार एंव प्रशिक्षण के केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इस अवसर पर, प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श (स्रिक) कुलशासक, प्रो. वी. के. मलिक ने कहा, “यह केंद्र ज्ञान निर्माण, मापनीय मॉडल विकसित करने और सतत ग्रामीण विकास में शामिल हितधारकों की क्षमता बढ़ाने के लिए सहयोगी परियोजनाओं में संलग्न होगा।”

उत्तराखंड की अनूठी स्थलाकृति और कृषि पद्धतियों को देखते हुए, आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञता पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों के लिए प्रासंगिक समाधान तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्रामीण और दूरदराज के समुदायों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों और समावेशी जल प्रशासन से सीधे लाभ मिले।

इस सहयोग के महत्व पर विचार करते हुए, आईआईटी रुड़की के निदेशक, प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, “यह साझेदारी राष्ट्रीय विकास एंव सामाजिक कल्याण के प्रति आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। इस पहल के माध्यम से, हमारा उद्देश्य भारत के कमांड क्षेत्र के आधुनिकीकरण में सार्थक योगदान देना, ग्रामीण समुदायों की समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करना और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को समर्थन देना है। यह विकसित भारत@2047 के विज़न और जल शक्ति अभियान के लक्ष्यों के साथ सीधे तौर पर मेल खाता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा और कृषि लचीलापन को मज़बूत करता है।”

इस समझौता ज्ञापन पर जल शक्ति मंत्रालय के सीएडीडब्ल्यूएम विंग के आयुक्त श्री अनुज कंवल और एसआरआईसी, आईआईटी रुड़की कुलशासक प्रो. विवेक के. मलिक ने हस्ताक्षर किए। आईआईटी रुड़की के सतत ग्रामीण विकास केंद्र के प्रमुख प्रो. आशीष पांडे, जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग की संयुक्त संकाय सदस्य प्रो. कृतिका कोठारी और मंत्रालय के सीएडीडब्ल्यूएम विंग के निदेशक श्री अशोक के. जेफ ने इस सहयोग को औपचारिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सक्रिय रूप से शामिल रहे।

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर अकादमिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह जमीनी स्तर की चुनौतियों से निपटने के लिए आईआईटी रुड़की की बहु-विषयक क्षमताओं का उपयोग करता है, जिससे एक अधिक आत्मनिर्भर और सतत रूप से विकसित ग्रामीण भारत का मार्ग प्रशस्त होता है। यह सहयोग अत्याधुनिक अनुसंधान को जमीनी हकीकतों से जोड़ने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। जल शक्ति मंत्रालय के रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ आईआईटी रुड़की की तकनीकी विशेषज्ञता को एकीकृत करके, इस पहल का उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना, सिंचाई दक्षता बढ़ाना और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है। केवल एक तकनीकी हस्तक्षेप से कहीं अधिक, यह साझेदारी एक सार्थक प्रभाव उत्पन्न करने, समुदायों के उत्थान, कृषि पारिस्थितिकी प्रणालियों को पुनर्जीवित करने और भारत के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण “विकसित भारत@2047” में योगदान देने के बारे में है