
देहरादून।
38वें राष्ट्रीय खेलों में मेजबान उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 103 पदक अपने नाम किए और राज्य को पदक तालिका में 25वें से सातवें स्थान तक पहुंचाया। बावजूद इसके, राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले 243 खिलाड़ियों को एक साल बीतने के बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी है। इस मामले को लेकर खेल मंत्री रेखा आर्या ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को पत्र लिखकर विभागीय स्तर पर पद सृजित करने की मांग की है।

खेल मंत्री ने पत्र में उल्लेख किया है कि राज्य की खेल नीति के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देने का प्रावधान है। इसके बावजूद अब तक इन खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त पद सृजित नहीं किए जा सके हैं। मंत्री का कहना है कि खेल विभाग सहित अन्य विभागों में पदों का सृजन कर शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
मुक्केबाजी, ताइक्वांडो और एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन
पिछले वर्ष 28 जनवरी से 24 फरवरी तक उत्तराखंड को 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का अवसर मिला था। इन खेलों में राज्य के खिलाड़ियों ने विशेष रूप से मुक्केबाजी, ताइक्वांडो और एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उत्तराखंड की बेटी अंकिता ध्यानी ने 5000 मीटर दौड़ और 3000 मीटर बाधा दौड़ में पहला स्थान हासिल कर दो स्वर्ण पदक जीते।
मुक्केबाजी में निवेदिता कार्की, कपिल पोखरिया और नरेंद्र ने स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया, जबकि पूजा ने ताइक्वांडो में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा भी कई खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
पद सृजन अधूरा, नियुक्ति पर संशय
पूर्व में खेल, युवा कल्याण, परिवहन, वन, पुलिस और शिक्षा विभाग में खिलाड़ियों के लिए पद सृजित किए गए थे, लेकिन इन विभागों में सृजित कुल पदों में से लगभग 50 पद अब तक खाली पड़े हैं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं और खेल नीति के बावजूद खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी न मिलना अब सवाल खड़े कर रहा है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने उम्मीद जताई है कि मुख्य सचिव के स्तर पर शीघ्र निर्णय लेकर खिलाड़ियों को उनका हक दिलाया जाएगा, ताकि राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का मनोबल बना रहे।

