

देहरादून। राजधानी में दिनदहाड़े हुए गोलीकांड ने एक बार फिर कानून व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पिछले दो महीनों में यह चौथी बड़ी वारदात है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

मसूरी रोड स्थित गोली रेस्टोरेंट से लेकर जोहड़ी गांव तक करीब तीन किलोमीटर तक तेज रफ्तार कारों में सवार दो गुटों ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस बीच गोली लगने से निर्दोष सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी की दर्दनाक मौत हो गई।
इससे पहले फरवरी के पहले सप्ताह में हुए गुंजन हत्याकांड के बाद अर्जुन शर्मा और गैंगस्टर विक्रम शर्मा की भी दिनदहाड़े हत्या की जा चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने शहर में दहशत का माहौल बना दिया है।
सोमवार सुबह छात्रों और क्लब कर्मचारियों के बीच शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। आरोपियों द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग से कई लोगों की जान खतरे में पड़ गई। जिस स्थान पर घटना हुई, वहां पास में एक स्कूल भी है। गनीमत रही कि उस समय स्कूल बंद था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपी तेज हॉर्न बजाते हुए कारों में घूमते रहे और लगातार गोलियां चलाते रहे, लेकिन पुलिस की मौजूदगी कहीं नजर नहीं आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो शायद ब्रिगेडियर जोशी की जान बचाई जा सकती थी।
छात्रों तक कैसे पहुंच रहे अवैध हथियार?
घटना में शामिल दो गुटों में से एक गुट छात्रों का बताया जा रहा है, जो देहरादून के एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन छात्रों तक अवैध हथियार कैसे पहुंच रहे हैं। पुलिस को इस दिशा में गंभीरता से जांच करने की जरूरत है।
हाल की अन्य घटनाएं:
- 23 मार्च को प्रेमनगर में उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के 22 वर्षीय छात्र दिव्यांशु जटराना की गुटीय संघर्ष में हत्या कर दी गई।
- 4 मार्च को राजपुर क्षेत्र में दिनदहाड़े एक युवक के साथ मारपीट कर उसका मोबाइल और स्कूटी तोड़ दी गई।
- विकासनगर क्षेत्र में एक ढाबे पर मामूली विवाद के बाद एक युवक पर रॉड से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि राजधानी में कानून व्यवस्था को लेकर ठोस और सख्त कदम उठाने की तत्काल जरूरत है।
