
अल्मोड़ा के गोविंद सिंह माहरा राजकीय नागरिक चिकित्सालय में स्वच्छता और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल उस समय खुल गई जब जनसेवी एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें वार्डों से लेकर परिसर तक भारी गंदगी, अव्यवस्था और अधिकारियों की गैरमौजूदगी मिली।
संजय पाण्डे ने तत्काल इस गंभीर स्थिति की जानकारी प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश पुरोहित को दी। लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.के. वर्मा की बताते हुए उनसे संपर्क करने को कहा। जब संजय पाण्डे उनके कक्ष में पहुँचे तो डॉक्टर वर्मा अनुपस्थित थे।
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गजेन्द्र सिंह बिष्ट से संपर्क कर पाण्डे ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का नंबर प्राप्त किया, लेकिन फोन लगातार व्यस्त मिलने से यह संदेह गहरा गया कि कहीं जवाबदेही से बचने के लिए फोन फॉरवर्ड तो नहीं किया गया।
बाद में पता चला कि डॉ. वर्मा की आंख का ऑपरेशन हुआ है, लेकिन सवाल यह है कि उनकी अनुपस्थिति में अस्पताल की जिम्मेदारी किसे सौंपा गया था? आपात स्थिति में मरीज किसे संपर्क करता?
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सुबह प्रभारी सीएमओ द्वारा निरीक्षण किए जाने के बावजूद गंदगी और अव्यवस्था नहीं दिखी। इससे निरीक्षण की गंभीरता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
दोपहर 3 बजे से पहले ही अस्पताल लगभग खाली नजर आया। वरिष्ठ अधिकारी नदारद थे, और शिकायत के बाद भी किसी ने संपर्क करना उचित नहीं समझा, जो स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
संजय पाण्डे ने कहा,
“अस्पताल सेवा का स्थान है, लापरवाही का नहीं। मैं इस पूरे मामले को उच्च प्रशासन तक ले जाऊँगा ताकि दोष तय हो और तुरंत कार्रवाई हो।”

