फीकी पड़ रही देहरादून की चमक, मानक से आधी भीनहीं बची हरियाली…

देहरादून में बेतहाशा शहरीकरण के कारण हरियाली लगातार घट रही है, जहां मानक के 18% के मुकाबले केवल 5.98% ही हरित क्षेत्र बचा है। नगर निगम अब अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन को पार्क और ग्रीन एरिया में बदलने की योजना पर काम कर रहा है

तेजी से बढ़ता कंक्रीट का जंगल, बेतरतीब विकास और अनियोजित निर्माण ने देहरादून की पहचान रही हरी-भरी वादियों को खतरे में डाल दिया है। मानक के अनुसार, यहां कुल विकसित क्षेत्र में से 18% हरित क्षेत्र होना चाहिए, लेकिन एमडीडीए के मास्टर प्लान में सिर्फ 5.98% ही हरित क्षेत्र दर्शाया गया है। पार्क, बाग-बगीचे या खुले मैदान एक से 2% तक सीमित हो गए हैं। लिहाजा, दून निगम हरियाली बढ़ाने की ओर फोकस करने जा रहा है। बीते कुछ माह में 20 हेक्टेयर से अधिक जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई गई है। इसे ग्रीन एरिया और पार्क में बदलने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

देहरादून नगर निगम के नगर आयुक्त नमामी बंसल ने कहा, नगर निगम के विभिन्न वार्डों में जिन सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराया गया है, उनको ग्रीन एरिया के रूप में विकसित किया जाएगा। कुछ जगह पार्क बनाने के साथ ही साथ पौधरोपण किया जाएगा, ताकि देहरादून की घटती हरियाली को बचाया जा सके।

कभी खूब होती थी खेती अब कंक्रीट का ही ढांचा
एक समय था, जब दून घाटी में गन्ना और धान की भरपूर खेती होती थी। आम और लीची के बाग बगीचों से यह क्षेत्र महकता था। लेकिन, समय के साथ बदलते दौर में आवासीय और वाणिज्यिक ढांचों ने इनकी जगह ले ली। पुराने मास्टर प्लान में 40% कृषि भूमि निर्धारित थी, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 10% ही रह गई है।
5.98% में भी अधिकतर संस्थानों की जमीन
दून में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित महायोजना-2041 में 16,774.75 हेक्टेयर विकसित इलाके में से मात्र 1071.25 हेक्टेयर क्षेत्र ही हरित क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। चिंता की बात है कि इसमें भी अधिकांश हिस्सा केंद्रीय संस्थानों की परिसंपत्तियों में आता है। यही नहीं, अब नर्सरी, बाग-बगीचे और पार्क का दायरा भी लगातार सिकुड़ रहा है।