
देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में बिजली विभाग से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर क्षेत्र के किसानों ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन टिकैत के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के ऊर्जा राज्य होने का हवाला देते हुए कृषि क्षेत्र के लिए विशेष रियायतें देने और विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की।
किसान नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं से बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन होता है, इसके बावजूद किसानों पर भारी बिजली बिलों का बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने खेती के लिए निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि ट्यूबवेल कनेक्शनों पर किसानों को कोल्हू चलाने की अनुमति दी जाए। वर्तमान में लगी पाबंदियों और अतिरिक्त शुल्क के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में विजिलेंस टीम द्वारा मारे जा रहे छापों पर किसानों ने गहरा रोष व्यक्त किया। उनका आरोप है कि गांवों में अनावश्यक छापेमारी कर किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है, जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए। साथ ही खराब ट्रांसफार्मर बदलने में देरी, जर्जर विद्युत लाइनों और ओवरबिलिंग की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया।
नियामक आयोग ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस अवसर पर भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष संजय चौधरी, हरिद्वार जिलाध्यक्ष विजय शास्त्री सहित चौधरी सुक्रमपाल सिंह, मुन्नू करौंदी, वेदपाल, प्रदीप चौधरी, मेजर नगला सलारू समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
