
टेंडर अवधि समाप्त होने के बावजूद शहर में अवैध रूप से लगे पोल कियोस्क के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। बृहस्पतिवार को निगम की टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाकर करीब 200 अवैध पोल कियोस्क उखाड़ दिए।

तीसरे दिन की सख्त कार्रवाई से अवैध विज्ञापन लगाने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। निगम अब तक करीब 800 अवैध बोर्ड हटा चुका है। वर्तमान में किसी भी विज्ञापन एजेंसी को पोल कियोस्क का वैध टेंडर आवंटित नहीं किया गया है।
इससे पूर्व देहरादून की एक विज्ञापन कंपनी को 33 लाख रुपये में पोल कियोस्क का ठेका दिया गया था, जिसकी अवधि 31 अक्तूबर 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद शहर में अवैध रूप से विज्ञापन लगाए जा रहे थे।
नगर निगम के अनुसार शहर में कुल 1300 पोल कियोस्क निर्धारित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या पर अवैध विज्ञापन लगे हुए थे। शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और गलियों में यह अवैध खेल लंबे समय से चल रहा था।
इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद निगम ने सख्त रुख अपनाया। पहले दिन करीब 300, दूसरे दिन 250 से अधिक और तीसरे दिन बृहस्पतिवार को 200 पोल कियोस्क हटाए गए।
वरिष्ठ कर निर्धारण अधिकारी एसपी गुप्ता ने बताया कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
अवैध गैंट्री से लाखों की कमाई, कार्रवाई नदारद, एक गैंट्री से सालाना छह लाख रुपये का राजस्व
नगर निगम जहां पोल कियोस्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध गैंट्री के मामले में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आवास के बाहर चौराहे पर लगी अवैध गैंट्री अब भी जस की तस बनी हुई है। सड़क सुरक्षा समिति ने इस गैंट्री को सड़क दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार बताते हुए इसे हटाने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद निगम ने इसे अपने टेंडर में शामिल नहीं किया है।
निगम का टेंडर एक गैंट्री के लिए सालाना करीब छह लाख रुपये में जारी होता है, जबकि इस अवैध गैंट्री से संबंधित विज्ञापन कंपनी इससे कहीं अधिक की कमाई कर रही है। वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र में दो गैंट्री हैं, जिनकी संख्या बढ़ाकर 6 से 7 किए जाने की योजना है।
वरिष्ठ कर निर्धारण अधिकारी एसपी गुप्ता ने बताया कि जांच कराकर सभी अवैध विज्ञापनों को हटाया जा रहा है और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

