अंकिता हत्याकांड में ‘वीआईपी कौन’ की तलाश, उर्मिला सनावर के खुलासों के बाद सियासी तूफान, अब सीबीआई करेगी जांच

देहरादून। उर्मिला सनावर के सनसनीखेज खुलासों के साथ शुरू हुआ सियासी तूफान अब नई दिशा में बढ़ता दिख रहा है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में लंबे समय से उठ रहे “वीआईपी कौन” के सवाल का जवाब अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तलाशेगी। 22 दिसंबर को उर्मिला सनावर द्वारा किए गए खुलासों और सोशल मीडिया पर साझा की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग के बाद पूरे राज्य में मामले की सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई थी।

अंकिता केस को लेकर किए गए कई दावे
भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और फिल्मी कलाकार उर्मिला सनावर के बीच संबंधों को लेकर पहले भी विवाद और सुलह के कई दौर सामने आ चुके हैं, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। लेकिन दिसंबर के अंतिम सप्ताह में उर्मिला के खुलासों ने उत्तराखंड की राजनीति को झकझोर कर रख दिया। उर्मिला ने दावा किया कि वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग उनकी और पूर्व विधायक सुरेश राठौर के बीच हुई बातचीत है।

सुरेश राठौर ने झाड़ा पल्ला
23 दिसंबर को सुरेश राठौर स्वयं सामने आए और इन ऑडियो क्लिप्स को एआई से निर्मित बताते हुए खुद को मामले से अलग करने की कोशिश की। हालांकि इसके बाद भी उर्मिला सनावर लगातार नए वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी करती रहीं। इन रिकॉर्डिंग्स में न सिर्फ अंकिता भंडारी हत्याकांड पर बातचीत होने का दावा किया गया, बल्कि मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों को भी एक बार फिर हवा मिल गई।

मुकदमे, सियासी आरोप और बढ़ता तनाव
लगातार हो रहे खुलासों के बीच उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर, दोनों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, इन वीडियो के आधार पर आरोप लगा रहे विपक्षी राजनीतिक दलों के खिलाफ भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ने भी मुकदमा दर्ज कराया। एक ओर पूरा उत्तराखंड इस मुद्दे को लेकर उबलता रहा, तो दूसरी ओर उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर कुछ दिनों तक अंडरग्राउंड रहे।

अचानक बदला घटनाक्रम
दो दिन पहले घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ लिया, जब लंबे समय बाद उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर दोनों सार्वजनिक रूप से सामने आए। अब जबकि मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की बात सामने आ रही है, राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और सभी की निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं—अंकिता हत्याकांड में आखिर ‘वीआईपी’ कौन है।