
देहरादून। आमतौर पर आपराधिक घटनाओं के लिहाज से शांत रहने वाले उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह की चिंता बढ़ा दी है। डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों में हाल के समय में तेज़ बढ़ोतरी देखी जा रही है। राज्यपाल का कहना है कि ऐसे अपराध तकनीक आधारित हैं, इसलिए उनसे निपटने के लिए सुरक्षा तंत्र को भी तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा।

लोकभवन में अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में कानून को सीधी चुनौती देने वाले अपराध कम हैं, लेकिन साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। इनका प्रभाव केवल धनहानि तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ितों को गंभीर मानसिक क्षति भी पहुंचा रहा है। कई मामलों में लोग घरों में कई-कई दिनों तक डिजिटल रूप से “कैद” रहने के बाद ठगे जाने की सच्चाई सामने आती है।
राज्यपाल ने कहा कि सरकार को इस चुनौती से निपटने के लिए दो स्तरों पर काम करना होगा। पहला, आम लोगों को जागरूक करना कि वे किस तरह की सावधानियां अपनाकर ऐसे अपराधों से बच सकते हैं। दूसरा, यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाता है तो उससे बाहर निकलने के उपाय, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और संपर्क सूत्रों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकनीकी अपराधों से निपटने के लिए पुलिसिंग को आधुनिक बनाना जरूरी है। अपराधी कहीं से भी बैठकर वारदात को अंजाम दे सकता है, इसलिए हमें उससे एक कदम आगे रहकर सोचना होगा। इसके लिए न केवल प्रशिक्षण बल्कि शोध और विश्लेषण पर भी जोर देना होगा।
राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन एक से दो साइबर अपराध के मामले सामने आ रहे हैं। सरकार ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की स्थापना की है और 20 साइबर कमांडो तैनात किए गए हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए आईटी विशेषज्ञों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यापक उपयोग की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात में साइबर अपराधों पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्य की पुलिसिंग में ढांचागत बदलाव की जरूरत बताते हुए उन्होंने टिहरी के नरेंद्र नगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज को तकनीकी और शोध के नए केंद्र के रूप में विकसित करने का आग्रह किया है।
राज्यपाल के अनुसार, यदि पुलिसकर्मी तकनीकी रूप से दक्ष और संसाधनों से सुसज्जित होंगे, तो साइबर अपराधियों के चेहरों को बेनकाब किया जा सकेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कानून अपराध के बाद काम करता है, लेकिन जागरूकता और सजगता ऐसे अपराधों को होने से पहले ही रोक सकती है। बदलते अपराध के स्वरूप के साथ हमें भी खुद को बदलना होगा।
